Sunday, March 14, 2010

चुटकुले

NDप्रश्न : दद्दू, एक टीवी विज्ञापन के अनुसार सबसे बड़ा टिकट आईपीएल क्रिकेट का टिकट है। मेरा प्रश्न है कि सबसे बड़ा टिकट एक दिवसीय क्रिकेट मैच का क्यों नहीं? उत्तर- एक दिवसीय क्रिकेट मैच का टिकट भी कोई टिकट है। वह तो हमारे नेताओं और अधिकारियों को यूँ ही मुफ्त में मिल जाया करते हैं।

खुशी से मर जाऊँगा... हिंदी" href="http://search.webdunia.com/search.aspx?w=true&lid=HI&q=
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आज मैंने एक जान बचाई, पूछो कैसे?
NDएक भिखारी से मैंने पूछा- अगर मैं तुम्हें 1000 का नोट दूँ तो क्या करोगे? वो बोला खुशी से मर जाऊँगा! तो मैंने उसे पैसे नहीं दिए...!
डॉक्टर (मरीज से)- अगर आप अपना वेट घटाना चाहते हैं तो आपको तीन चीजें छोड़ना होगी! मरीज- कौन-कौन सी डॉक्टर साहब?डॉक्टर- ब्रेक फास्ट, लंच और डिनर।

रमन की परेशानी
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NDरोजाना घर आने वाले सेल्समैनों से परेशान रमन ने घर के बाहर एक बोर्ड टाँग दिया- कृपया सेल्समैन ध्यान दें! हमें माँग कर उपयोग करने की आदत है। आप जो कुछ बेचने लाए हैं, वह हमारे पड़ोसियों को बेचें। जरूरत पड़ने पर हम उनसे माँग लेंगे।


फाइनल एक्जाम
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NDदादी को धार्मिक किताब पढ़ते देख पोता अपने मम्मी से बोला- माँ, दादी कौन से एक्जाम की तैयारी कर रही हैं? माँ बोली- बेटा, फाइनल एक्जाम की।
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सिर्फ कल्पना नहीं छठी इंद्रिय
घटनाओं का पूर्वाभास कराती है
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प्रस्तुति - किरण बाला
NDक्या मनुष्य की छठी इंद्रिय होती है? कुछ लोग इसे हकीकत मानते हैं और कुछ कोरी कल्पना। अब वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में स्पष्ट किया है कि छठी इंद्रिय की बात सिर्फ कल्पना नहीं, वास्तविकता है, जो हमें किसी घटित होने वाली घटना का पूर्वाभास कराती है।यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के रॉन रेसिक ने एक अध्ययन कर पाया कि छठी इंद्रिय के कारण ही हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वाभास होता है। ऐसा माना जा रहा है कि अब लोगों की छठी इंद्रिय को और सक्रिय करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वाहनों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी हो सके।
NDरेसिक के अनुसार छठी इंद्रिय जैसी कोई भावना तो है और यह सिर्फ एक अहसास नहीं है। वास्तव में होशो-हवास में आया विचार या भावना है, जिसे हम देखने के साथ ही महसूस भी कर सकते हैं। और यह हमें घटित होने वाली बात से बचने के लिए प्रेरित करती है। करीब एक-तिहाई लोगों की छठी इंद्रिय काफी सक्रिय होती है। उन्हें घटनाओं का पूर्वाभास हो जाता है। इसे सही तरीके से परिभाषित करना तो मुश्किल है, लेकिन इसके होने से इंकार भी नहीं किया जा सकता है।अल सुबह नींद से जागने के लिए अलार्म घड़ियाँ तो हर कोई इस्तेमाल करता है। लेकिन बहुत कम लोग इस बात को जानते होंगे कि प्रकृति ने हमारे शरीर के भीतर भी एक अलार्म घड़ी की व्यवस्था कर रखी है। हाल ही में हुए वैज्ञानिक शोध से इस बात का पता चला है कि जब कभी हमें तड़के कहीं जाना होता है तो जागने के समय का अलार्म हमारे मस्तिष्क में स्वतः भर जाता है। हम भले ही सोते रहते हैं, लेकिन निर्धारित समय से 1 घंटे पूर्व हमारे रक्त में एक विशेष हार्मोन का स्राव होने लगता है और जब वह चरम सीमा पर पहुँच जाता है तो हमारी नींद खुल जाती है। वैज्ञानिक इसे हार्मोन घड़ी कहते हैं।
छठी इंद्री को जाग्रत करें
होशपूर्वक जीना ही है विधि
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छठी इंद्री को अंग्रेजी में सिक्स्थ सेंस कहते हैं। सिक्स्थ सेंस को जाग्रत करने के लिए योग में अनेक उपाय बताए गए हैं। इसे परामनोविज्ञान का विषय भी माना जाता है। असल में यह संवेदी बोध का मामला है। गहरे ध्यान प्रयोग से यह स्वत: ही जाग्रत हो जाती है।
NDकहते हैं कि पाँच इंद्रियाँ होती हैं- नेत्र, नाक, जीभ, कान और यौन। इसी को दृश्य, सुगंध, स्वाद, श्रवण और स्पर्श कहा जाता है। किंतु एक और छठी इंद्री भी होती है जो दिखाई नहीं देती, लेकिन उसका अस्तित्व महसूस होता है। वह मन का केंद्रबिंदु भी हो सकता है या भृकुटी के मध्य स्थित आज्ञा चक्र जहाँ सुषुन्मा नाड़ी स्थित है।सिक्स्थ सेंस के कई किस्से-कहानियाँ किताबों में भरे पड़े हैं। इस ज्ञान पर कई तरह की फिल्में भी बन चुकी हैं और उपन्यासकारों ने इस पर उपन्यास भी लिखे हैं। प्राचीनकाल या मध्यकाल में छठी इंद्री ज्ञान प्राप्त कई लोग हुआ करते थे, लेकिन आज कहीं भी दिखाई नहीं देते तो उसके भी कई कारण हैं।मेस्मेरिज्म या हिप्नोटिज्म जैसी अनेक विद्याएँ इस छठी इंद्री के जाग्रत होने का ही कमाल होता है। हम आपको बताना चाहते हैं कि छठी इंद्री क्या होती है और योग द्वारा इसकी शक्ति कैसे हासिल की जा सकती है और यह भी कि जीवन में हम इसका इस्तेमाल किस तरह कर सकते हैं।क्या है छठी इंद्री : मस्तिष्क के भीतर कपाल के नीचे एक छिद्र है, उसे ब्रह्मरंध्र कहते हैं, वहीं से सुषुन्मा रीढ़ से होती हुई मूलाधार तक गई है। सुषुन्मा नाड़ी जुड़ी है सहस्रकार से।इड़ा नाड़ी शरीर के बायीं तरफ स्थित है तथा पिंगला नाड़ी दायीं तरफ अर्थात इड़ा नाड़ी में चंद्र स्वर और पिंगला नाड़ी में सूर्य स्वर स्थित रहता है। सुषुम्ना मध्य में स्थित है, अतः जब हमारे दोनों स्वर चलते हैं तो माना जाता है कि सुषम्ना नाड़ी सक्रिय है। इस सक्रियता से ही सिक्स्थ सेंस जाग्रत होता है।इड़ा, पिंगला और सुषुन्मा के अलावा पूरे शरीर में हजारों नाड़ियाँ होती हैं। उक्त सभी नाड़ियों का शुद्धि और सशक्तिकरण सिर्फ प्राणायाम और आसनों से ही होता है। शुद्धि और सशक्तिकरण के बाद ही उक्त नाड़ियों की शक्ति को जाग्रत किया जा सकता है।छठी इंद्री के जाग्रत होने से क्या होगा : व्यक्ति में भविष्य में झाँकने की क्षमता का विकास होता है। अतीत में जाकर घटना की सच्चाई का पता लगाया जा सकता है। मीलों दूर बैठे व्यक्ति की बातें सुन सकते हैं। किसके मन में क्या विचार चल रहा है इसका शब्दश: पता लग जाता है। एक ही जगह बैठे हुए दुनिया की किसी भी जगह की जानकारी पल में ही हासिल की जा सकती है। छठी इंद्री प्राप्त व्यक्ति से कुछ भी छिपा नहीं रह सकता और इसकी क्षमताओं के विकास की संभावनाएँ अनंत हैं।
WDकैसे जाग्रत करें छठी इंद्री : यह इंद्री सभी में सुप्तावस्था में होती है। भृकुटी के मध्य निरंतर और नियमित ध्यान करते रहने से आज्ञाचक्र जाग्रत होने लगता है जो हमारे सिक्स्थ सेंस को बढ़ाता है। योग में त्राटक और ध्यान की कई विधियाँ बताई गई हैं। उनमें से किसी भी एक को चुनकर आप इसका अभ्यास कर सकते हैं।शांत-स्वच्छ वातावरण : अभ्यास के लिए सर्वप्रथम जरूरी है साफ और स्वच्छ वातावरण, जहाँ फेफड़ों में ताजी हवा भरी जा सके अन्यथा आगे नहीं बढ़ा जा सकता। शहर का वातावरण कुछ भी लाभदायक नहीं है, क्योंकि उसमें शोर, धूल, धुएँ के अलावा जहरीले पदार्थ और कार्बन डॉक्साइट निरंतर आपके शरीर और मन का क्षरण करती रहती है।प्राणायाम का अभ्यास : वैज्ञानिक कहते हैं कि दिमाग का सिर्फ 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा ही काम करता है। हम ऐसे पोषक तत्व ग्रहण नहीं करते जो मस्तिष्क को लाभ पहुँचा सकें, तब प्राणायाम ही एकमात्र उपाय बच जाता है। इसके लिए सर्वप्रथम जाग्रत करना चाहिए समस्त वायुकोषों को। फेफड़ों और हृदय के करोड़ों वायुकोषों तक श्वास द्वारा हवा नहीं पहुँच पाने के कारण वे निढाल से ही पड़े रहते हैं। उनका कोई उपयोग नहीं हो पाता।उक्त वायुकोषों तक प्राणायाम द्वारा प्राणवायु मिलने से कोशिकाओं की रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ जाती है, नए रक्त का निर्माण होता है और सभी नाड़ियाँ हरकत में आने लगती हैं। छोटे-छोटे नए टिश्यू बनने लगते हैं। उनकी वजह से चमड़ी और त्वचा में निखार और तरोताजापन आने लगता है।*तो सभी तरह के प्राणायाम को नियमित करना आवश्यक है।मौन ध्यान :भृकुटी पर ध्यान लगाकर निरंतर मध्य स्थित अँधेरे को देखते रहें और यह भी जानते रहें कि श्वास अंदर और बाहर ‍हो रही है। मौन ध्यान और साधना मन और शरीर को मजबूत तो करती ही है, मध्य स्थित जो अँधेरा है वही काले से नीला और ‍नीले से सफेद में बदलता जाता है। सभी के साथ अलग-अलग परिस्थितियाँ निर्मित हो सकती हैं।मौन से मन की क्षमता का विकास होता जाता है जिससे काल्पनिक शक्ति और आभास करने की क्षमता बढ़ती है। इसी के माध्यम से पूर्वाभास और साथ ही इससे भविष्य के गर्भ में झाँकने की क्षमता भी बढ़ती है। यही सिक्स्थ सेंस के विकास की शुरुआत है।अंतत: हमारे पीछे कोई चल रहा है या दरवाजे पर कोई खड़ा है, इस बात का हमें आभास होता है। यही आभास होने की क्षमता हमारी छठी इंद्री के होने की सूचना है। जब यह आभास होने की क्षमता बढ़ती है तो पूर्वाभास में बदल जाती है। मन की स्थिरता और उसकी शक्ति ही छठी इंद्री के विकास में सहायक सिद्ध होती है।
कुछ लोगों के लिए प्रेम योग होता है और कुछ लोगों के लिए रोग। देखने में आया है कि ज्यादातर लोगों के लिए तो प्रेम रोग ही बन जाता है और वह भी ऐसा असाध्य रोग जिसकी दवा खोजना मुश्किल ही है।प्रेम योग होता है या रोग इन दोनों के पक्ष में तर्क जुटाएँ जा सकते हैं, लेकिन असल में तो प्रेम योग ही माना जाता रहा है। वर्तमान युग में कौन करता है नि:स्वार्थ प्रेम। यह तो सब किताबी बातें हैं, इसीलिए तो प्रेम कभी भी योग नहीं रोग बन जाता है।ज्ञानीजन कहते हैं कि कामवासना से संवेदना और संवेदना से प्रेमयोग की ओर बढ़ों। आप जिससे भी प्रेम करते हैं और यदि उसे पाने की चाहत रखते हैं या उसके प्रति आपके मन में कामवासना का भाव उठता है तो फिर प्रेम कहाँ हुआ? या तो कामवासना है या फिर चाहत तो यह दोनों छोड़कर प्रेम की ओर सिर्फ एक कदम बढ़ाओ। फीजिकल एट्रेक्शन को जानवरों में भी होता है।*प्रेम रोगी : 'पागल प्रेमी' या 'दीवाना प्रेमी' नाम तो आपने सुना ही होगा। इस तरह के प्रेमियों के कारनामे भी अखबारों की सुर्खियाँ बनते हैं। कोई अपने हाथ पर प्रेमिका का नाम गुदवा लेता है तो कोई प्रेम में जान भी दे देता है। कितने पागल होंगे वे लोग जो खून से पत्र लिखते हैं।इससे भी भयानक यह कि जब ‍कोई प्रेमिका उसका साथ छोड़कर चली जाती है तो फिर वो उसका कत्ल तक कर देते हैं अब आप ही सोचे क्या यह प्रेम था। प्रेम में हत्या और आत्महत्या के किस्से हम सुनते आए हैं। यह सब किस्से उन लोगों के हैं जो यह तो कामवासना से भरे रहते हैं या फिर चाहत से चिपक जाते हैं। इन्हें प्रेम रोगी भी कहना प्रेम शब्द का अपमान होगा।*प्रेम योग : एक दर्शनिक ने कहा कि नि:स्वार्थ प्रेम परमात्मा की प्रार्थना की तरह होता है ऐसा कहने से शायद आप समझे क्या फिलॉसफी की बात करते हो, तो मैं यहाँ कहना चाहूँगा कि प्रेम करना या होना सबसे बड़ा स्वार्थ है। जो व्यक्ति स्वयं से प्रेम करता है वहीं दूसरों से प्रेम कर सकता है और दूसरों से प्रेम करने में भी स्वार्थ ही होता है, क्योंकि दूसरा जब यह जानता है कि कोई हमें प्रेम करता है तो हमें यह जानकर खुशी होती है कि उसके मन में हमारे प्रति अच्छी भावना है। हम दूसरों को खुश रखने में ज्यादा खुश होते हैं।प्रेम का संबंध स्वतंत्रता और सहयोग से है- चाहत या कामवासना से नहीं। लेकिन विश्व के प्रत्येक व्यक्ति की परिभाषा प्रेम के मामले में अलग-अलग हो सकती है। हम यहाँ आध्यात्मिक प्रेम की बात नहीं करते हम तो सिर्फ आप से पूछते हैं कि यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो आप उसे प्रत्येक स्थिति में सुखी ही रखना या देखना चाहेंगे।*कैसे बनें प्रेम योगी : और भी कई नाम लिए जा सकते हैं किंतु प्रमुख रूप से शिव, नारद और कृष्ण ये लोग प्रेम योगी थे। योग की विशेषता तो शुद्ध और पवित्र प्रेम में ही है। इस प्रेम का वर्णन नहीं किया जा सकता यह अनुभूति की बात है। पहले तो स्वयं से ही प्रेम करना सीखें। फिर दूसरों को समझे अपने भाव और विचारों का अर्थात वह भी उसी दुख और सुख में जी रहा है जिस में तुम। *स्वयं का सामना : दूसरों को जब भी देंखे तो यह समझें कि यह मैं ही हूँ। बस इस भाव को गहराने दें। मोह, राग, विरह, लगाव, मिलन या चाहत से भिन्न यह प्रेम आपके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का विकास तो करेगा ही साथ ही आप लोगों से इस तरह मिलना शुरू करेंगे जैसे कि स्वयं से ही मिल रहे हों। यही सफलता का राज भी है।'बिना चाहत और कामवासना के हमें फूलों से प्रेम है'
फिट है, तो हिट है...
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FILEबॉलीवुड स्टार शिल्पा शेट्टी के बाद बिपाशा बसुHot and Sensual Pics of Bipasha Basu योग की शरण में हैं। रेखाGet Fabulous Photos of Rekha आज भी ‍सुंदर और फिट नजर आती हैं। अमिताभ बच्चनBig B !! The Super Stars Photogallery अभी भी दिन-रात काम करते हैं, क्योंकि वे फिट हैं, जबकि 70 के दशक के उनके साथ के स्टार बहुत पहले ही स्क्रीन से ऑउट हो गए हैं।वे क्रिकेटर जिन्होंने अपनी फिटनेस पर ध्यान नहीं दिया, उन्हें सिलेक्टर्स ने क्लीन बोल्ड कर दिया है। सचिन, सहवाग, लारा, सनथ जयसूर्या आदि सभी क्रिकेटरों की सफलता का राज उनकी फिटनेस में ही छुपा है। आमिर और शाहरुख खानGlamorous Pictures of King Khan फिट नहीं रहते तो....न 'गजनी' बनती और न ही 'ओम शांति ओम' हिट होती। अक्षय कुमारAkashay Kumar photo collection और रितिक रोशन की कसी हुई बॉडी पर सभी फिदा हैं। स्टूडेंट लाइफ, फिल्म, मॉडलिंग, पॉलिटिक्स, स्पोर्ट्स, बिजनेस और अदर फील्ड में फिटनेस पर ध्यान नहीं दिया तो जल्दी ऑउट हो जाओगे और हिट होने का तो सवाल ही नहीं बल्कि फ्लॉप माना जाएगा। इसीलिए हम लाएँ हैं हिट रहने के लिए फिट रहने के इज़ी टिप्स।योगा एक्सरसाइज : आई बॉल, जीभ, हाथ-पैर की कलाइयाँ, पैर के पंजे, कमर और गर्दन को दाएँ-बाएँ और ऊपर-नीचे करते हुए गोल-गोल क्लॉकवाइज और एंटी क्लॉकवाइज घुमाएँ। हाथों की मुट्ठी को खोलें और बंद करें। इसी तरह पैरों की अँगुलियों की योगा एक्सरसाइज करें। कानों को मरोड़ें, पूरा मुँह खोलकर बंद करें। गादी पर लोट लगाएँ। गुलाटी लगाने का प्रयास न करें। खुलकर हँसे और छींके। अँगड़ाई आए तो उसे अच्छे से मजा लेते हुए करें। यह सब कुछ योग के अंग संचालन का हिस्सा मात्र है। अंग संचालन के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल करें।रेचक क्रिया : सिर्फ 10 मिनट के लिए श्वास लेने और छोड़ने का एनर्जी वॉल्यूम खड़ा कर दें। ऐसा वॉल्यूम जो आपकी बॉडी और माइंड को झकझोर दे। फिर चीखें, चिल्लाएँ, नाचें, गाएँ, रोएँ, कूदें और हँसें। यह रेचक प्रक्रिया है। इससे सारा स्ट्रेस बाहर आ जाएगा। ‍अनावश्यक चर्बी घटकर बॉडी फिट रहती है और भीतर जो भी दूषित वायु तथा विकार है, उसके बाहर निकलने से चेहरे और शरीर की चमक बढ़ जाती है। इसे करने के बाद 10 मिनट का ध्यान करें।पॉवर योगा : इसी को हठयोग कहते हैं। हठयोग का अभ्यास कर आज का मानव हर तरह के रोग और शरीर की कमजोरी से निजात पा सकता है। इस योग का पालन करने से व्यक्ति की मेंटल और फिजिकल हेल्थ पॉवर बढ़ जाती है। धौति, वस्ति, नेति, त्राटक, नौली एवं कपालभाती- ये छ: षट्‍कर्म के अंग हैं। इन्हें अच्छे से सीखकर करें और फिर देंखे की आपके शरीर में कितनी ताकत समा गई है।योगा मसाज : इससे माँसपेशियाँ पुष्ट होती हैं। दृष्टि तेज होती है। चैन की नींद आती है। शरीर में शक्ति उत्पन्न होकर शरीर का रंग सोने के समान चमकता है। योगा मसाज से ब्लड सर्कुलेशन सुचारु चलता है। इससे टेंशन और डिप्रेशन भी दूर होता है। तब पूरे बदन का घर्षण, दंडन, थपकी, कंपन और संधि प्रसारण के तरीके से मसाज कराएँ।योगा पैकेज : माह में एक बार उपरोक्त कार्य अवश्य करें और इसके अलावा कुछ नियमित करना चाहें तो आंजनेय आसन, परिपूर्ण नौकासन, पादहस्तासन, त्रिकोणासन, ब्रह्म मुद्रा और सूर्य नमस्कार करें। प्राणायम में शीतली और भ्रामरी नहीं भी करना चाहें तो तो नाड़ीशोधन नियमित करें। सूत्र और जल नेति करने से चेहरे की चमक बढ़ती है तथा नेत्र रोग में लाभ मिलता है। मूल और उड्डीयान बंध का प्रयोग भी लाभदायक है। पाँच मिनट का ध्यान अवश्य करें।

योग

FILEदेखने में आया है कि युवा करियर, प्रेम, जॉब या अन्य कारणों से ‍टेंशन या डिप्रेशन में रहने लगे हैं। इससे साँसों की गति अनबेलेंस हो जाती है, जिससे खून की गति भी असंतुलित हो जाती है। इसका सीधा असर हृदय, फेफड़े, पेट और दिमाग पर होता है। लगातार टेंशन या डिप्रेशन में रहने से गंभीर रोग होने का खतरा बढ़ जाता है जैसे अस्थमा, हार्ट अटैक, डायबिटीज, नेत्र रोग, ब्रेन स्ट्रोक आदि। उक्त सभी से हम जीवन के हर मोर्चे पर असफल हो सकते हैं। प्रस्तुत है इस सब से बचने के लिए योगा टिप्स।क्या होगा प्राणायाम से :योगा एक्सपर्ट और डॉक्टरों का मानना है कि सामान्यत: टाइटल रेस्पिरेशन (श्वसन क्रिया) में फेफड़े के सिर्फ 20 प्रतिशत भाग को ही काम करना पड़ता है। शेष ‍हिस्से निष्‍क्रिय से रहते हैं। इस निष्क्रिय से हिस्सों में रक्त का प्रवाह भी अत्यंत मंद रहता है। यदि हम प्रतिदिन व्यायाम या प्राणायाम न करें, तो वायुकोषों को पर्याप्त ताजी हवा और बेहतर रक्त प्रवाह से वंचित रह जाना पड़ता है। यही वजह है कि हम थोड़े से कार्य के बाद ही बुरी तरह से हाँफने लगते हैं। थोड़े से दुख से ही हम दुखी हो जाते हैं। हम सदा भयभीत जीवन जीने लगते हैं।डॉक्टर कहते हैं कि गहरी साँस न लेने के कारण फेफड़े के शीर्षस्थ भाग में रक्त प्रवाह काफी कम होने से ट्यूबरकुलोसिस जैसी गंभीर बीमारी सबसे पहले फेफड़े के शीर्षस्थ भाग में फैलती है। जब व्यक्ति टेंशन या डिप्रेशन में रहता है तो श्वसन क्रिया का 20 प्रतिशत सक्रिय रहने वाला भाग घटकर 10 से 15 के बीच ही सक्रिय रह पाता है। पर्याप्त वायु के भीतर नहीं जाने के कारण शरीर के अन्य अंग भी निष्क्रिय होने लगते हैं और उनमें रक्त का प्रभाव भी मंद पड़ जाता है, जो कि उम्र को घटाने वाला सिद्ध होता है।लेकिन प्राणायाम करने से फेफड़े में ज्यादा हवा प्रवेश करती है यह सामान्य की तुलना में लगभग चार-पाँच गुना होती है यानी सभी 100 प्रतिशत वायुकोषों को भरपूर ताजी हवा मिलने के कारण पसलियों की माँसपेशियाँ भी ज्यादा काम करती हैं। साथ ही रक्त का प्रवाह भी बढ़ जाता है। इसी तरह दोनों फेफड़ों के बीच बैठा हृदय सब तरफ से दबाया जाता है, परिणाम स्वरूप इसको भी ज्यादा काम करना ही पड़ता है। इस तेज प्रवाह के कारण वे कोशिकाएँ भी पर्याप्त रक्तसंचार, प्राणवायु और पौष्टिक तत्व से सराबोर हो जाती हैं। भोजन से ज्यादा जरूरत जल की और जल से ज्यादा जरूरत हमें ताजा और शुद्ध वायु की होती है अत: प्राणायाम के महत्व को समझा जाना चाहिए।कैसे रहें चिंता मुक्त : जब भी तनावग्रस्त या ज्यादा सोचग्रस्त रहें तो तुरंत ही पेट और फेफड़ों की हवा पूरी तरह से बाहर निकाल दें और नए सिरे से ताजी हवा भरें। ऐसा पाँच से छह बार करें या सिर्फ 30 सेकंट के लिए भ्रस्तिका कर लें। अनुलोम-विलोम नियमित करें। हँसने का मौका हो तो खिलखिलाकर हँसें। अत्यधिक चिंता को छोड़कर निश्चिंतता की आदत डालें।झपकी ध्यान : सिर्फ एक मिनट का झपकी ध्यान करें। ऑफिस या घर में जब भी लगे तो 60 सेकंड की झपकी मार ही लें। इसमें साँसों के आवागमन को तल्लीनता से महसूस करें। गहरी-गहरी साँस लें। यह न सोचे क‍ि कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा। हाँ ऑफिस में इसे सतर्कता से करें, वरना बॉस गलत समझ बैठेंगे। इस ध्यान से आप स्वयं को हर वक्त तरोताजा महसूस करेंगे।मौन से होता मन मजबूत: मौन से मन की आंतरिक्त शक्ति और रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। कुछ क्षण ऐसे होते हैं जबकि हम खुद-ब-खुद मौन हो जाते हैं। ऐसा कुछ विशेष परिस्थिति में होता है, लेकिन मौन रहने का प्रयास करना और यह सोचते हुए क‍ि मौन में कम से कम सोचने का प्रयास करूँगा, ज्यादा से ज्यादा देखने और साँसों के आवागमन को महसूस करने का प्रयास करूँगा, एक बेहतर शुरुआत होगी। दो घंटे की व्यर्थ की बहस से 10 मिनट का मौन रिफ्रेश करने से विजन पावर बढ़ेंगा।योगा पैकेज : अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें। शवासन में योग निंद्रा का लाभ लें। भोजन के बाद कुछ देर वज्रासन में बैठें या झपकी ध्यान करें। आंजनेय आसन, कटिचक्रासन, ब्रह्म मुद्रा और शीर्षासन को अच्छे से सीखकर करें।
नो टेंशन, नो हायपर टेंशन
लाइफ स्टाइल डिसीज है टेंशन
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NDआजकल युवा अक्सर मिलने पर एक-दूसरे को एडवाइस देते हैं कि 'कोई बात नहीं, टेंशन नहीं लेने का।' इसके बावजूद हम टेंशन लेते हैं और इससे परेशान रहते हैं। टेंशन, यानी मैंटल स्ट्रैस से ही जुड़ा हैं हायपर टेंशन यानी हाई ब्लड प्रैशर के भी तार। काम के लगातार लंबे होते घंटे, जंक फूड का सेवन, एक्सरसाइज की कमी आदि मॉर्डन लाइफ स्टाइल के अंग बन गए हैं। इन सब के साथ घर-बाहर हर कदम पर टेंशन से होने वाला सामना...। कुल मिलाकर हम हायपर टेंशन के लिए जमीन बनाने में जुटे हुए हैं।जो युवा हायपर टेंशन के शिकार होते हैं, उन्हें शुरुआती दौर में इसका पता ही नहीं चल पाता। धीरे-धीरे इसके लक्षण सामने आने लगते हैं। ये हैं : साँस फूलना, चक्कर आना, सिरदर्द, गर्दन में दर्द, आँखों के आगे कुछ सेकंड के लिए अँधेरा छा जाना आदि। मोटापा भी हायपर टेंशन की बहुत बड़ी वजह हो सकता है। स्मोकिंग व अल्कोहल का अधिक सेवन भी इसमें हेल्प करता है।
ND30-35 की उम्र में हायपर टेंशन के विषय में अलर्ट हो जाना चाहिए। यदि ऊपर दिए गए लक्षणों में से कोई एक लक्षण लगातार दिखाई दे, तो चेकअप अवश्य कराना चाहिए। यह मूलतः लाइफ स्टाइल डिसीज है, अतः इससे बचने के लिए अपनी लाइफ स्टाइल में सुधार करना जरूरी है। आहार में ताजे फल व सब्जियों को प्रमुखता दें। पैकिंग फूड या कैंड फूड (डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों) का सेवन न करें।सप्ताह में पाँच दिन आधा घंटा एक्सरसाइज करें। नियमित रूप से वॉकिंग करें। योगा व मेडिटेशन भी लाभप्रद साबित हो सकता है।